इंदौर. राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि महानायक टंट्या भील ने समाज में अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए अपना जीवन दिया। इस देश के विकास में आदिवासी का भी बड़ा योगदान है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के आदिवासी की समस्या एक जैसी है, लेकिन खुशी इस बात की है कि आदिवासियों के विकास, शिक्षा और कृषि पर बात करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तैयारी की है। संसद भवन में भी टंट्या भील की प्रतिमा लगाने की मांग की जाएगी। इसी जमीन पर महानायक टंट्या भील का जन्म हुआ और बाबा अंबेडकर का भी जन्म यहीं हुआ। देश का असली मालिक तो आदिवासी है। क्योंकि देश में जंगल को संवारने और समृद्ध करने का काम आदिवासी ही करते आए हैं। पवार शहीद टंट्या भील की 178वीं जयंती के मौके पर इंदौर में बिरसा ब्रिगेड के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर कई कार्यक्रम प्रदेश में हैं, पर मैंने यहां आना चुना। उन्होंने कहा की प्रदेश की पहचान देश-दुनिया में आदिवासी से थी और बिना आदिवासी के विकास के प्रदेश का विकास नहीं हो सकता। आपके कारण ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। आज की जरूरत आदिवासी संस्कृति को जीवित रखने की है। सरकार सबसे ज्यादा प्राथमिकता आदिवासी नौजवानों को देगी। सरकार को आदिवासियों का रक्षक करार करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस ने चार मंत्री दिए हैं, जिससे आदिवासियों की उन्नति हो सके।
आदिवासियों को शिक्षा और रोजगार देने पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रदेश में कोई भी आदिवासी बेरोजगार नहीं रहेगा, यह मेरा आप सब से वादा है। कार्यक्रम में मंत्री उमंग सिंघार और झाबुआ सांसद कांतिलाल भूरिया के साथ ही बड़ी संख्या में आदिवासीजन अपनी पारंपरिक वेश-भूषा में शामिल हुए। कई नौजवानों ने इस दौरान पैदल मार्च कर पातालपानी से दशहरा मैदान तक का सफर तय किया।