इंदौर. हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुछ कैदियाें को रिहा किया जाता है। इसी कड़ी में इंदौर की सेंट्रल जेल और जिला जेल में सजा काट रहे 23 कैदियों को रविवार को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहा होने के पहले उन्हें फूलों का हार पहनाकर तिरंगा दिया गया। इसके बाद प्रमाण पत्र देकर उन्हें विदा किया गया। परिजन उन्हें लेकर खुशी-खुशी घर रवाना हो गए।
मिली अनुसार जेल मुख्यालय ने रिहाई के मापदंड को पूरा करने वाले कैदियों की सूची मांगी गई थी। ऐसे 23 कैदियों की सूची भोपाल भेजी गई थी। सूची में शामिल 22 कैदी सेंट्रल जेल में सजा काट रहे थे, जबकि एक कैदी जिला जेल में था। भोपाल से मंजूरी के बाद इन कैदियों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर रिहा किया गया। ये जघन्य अपराध में 14-20 या आजीवन कारावास काट रहे थे। ये कैदी 14 साल की सजा भुगत चुके हैं और जेल में वे अनुशासन से रहे थे।
यह है रिहाई के मापदंड
सजा माफी के मपदंड में उन कैदियों को शामिल किया जाता है, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई हो और सजा के रूप में उन्होंने 14 साल या उससे अधिक समय जेल में काट लिया हो। सजा के दौरान इन कैदियों का अन्य कैदियों के प्रति व्यवहार ठीक होना चाहिए। जेल स्टाफ के प्रति भी ठीक व्यवाहर रखने वाले कैदियाें को रिहाई का लाभ मिलने की संभावना अधिक होती है। नियमों के अनुसार बलात्कार के आरोपियों को सजा माफी का लाभ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिया जाता है।