इंदौर . माफिया के खिलाफ अभियान के तहत रविवार को छह गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के 767 सदस्यों को प्लाॅट आवंटन पत्र खुद सीएम कमलनाथ सौंपेंगे। इनमें लक्ष्मणनगर, सुविधा, कसेरा तो वे संस्थाएं हैं, जो स्थापना के बाद से ही सदस्यों को वरीयता सूची से प्लाॅट देती आई है।
आईडीए द्वारा जमीन लिए जाने से उठे विवाद के बाद प्लाॅट देना मुश्किल हो गया था। रूपरेखा संस्था (जिसमें सबसे ज्यादा 536 सदस्यों को प्लाॅट मिल रहे हैं) की मूल समस्या ही नगर निगम से अटकी मंजूरी थी। जो अब जारी की गई है। मुहिम के पहले चरण में भूमाफिया से पीड़ित संस्था जैसे देवी अहिल्या, जागृति, जयहिंद, सविता, कर्मचारी, मजदूर पंचायत, श्रीराम कृपा आदि में प्रशासन ने हाथ नहीं डाला है। इन संस्थाओं में माफिया जमीन बेच चुके हैं या वैध सदस्यों को बाहर कर चुके हैं। कमिशनर आकाश त्रिपाठी ने 30 जून तक सभी को प्लाॅट या मुआवजा देने का लक्ष्य रखा है।
संस्था संचालक बोले- पहले भी देते रहे हैं प्लाॅट
- लक्ष्मणनगर संस्था के संचालक विपुल पसारी बताते हैं, साल 1981 में संस्था बनी थी। पहले भी प्लाॅट देते रहे हैं। आईडीए स्कीम में कुछ जमीन अटकने से दिक्कत आई थी, जो अब दूर हो गई है।
- सुविधा संस्था संचालक सुरेंद्र सिंह ठाकुर कहते हैं, साल 1979 में संस्था बनी। आईडीए के साथ विकास काे लेकर विवाद था, अब दूर हुआ है।
- कसेरा संस्था के संचालक विपुल बरोनिया बताते हैं, साल 1969 से संस्था बनी हुई है। पहले 154 सदस्यों को प्लाॅट दे चुके हैं। बाकी में खसरे, नपती और वरीयता सूची में शिकायत थी, अब दूर हुई है।
- रूपरेखा संस्था 1996 में संस्था बनी थी। विकास के मसले पर निगम से विवाद था। अब निराकरण हो गया है। शेष|पेज 12 पर
- महात्मा गांधी संस्था के गोपाल सिंह ने बताया कि संस्था 1980 में बनी थी, वरीयता सूची का विवाद है क्योंकि केवल 23 ही प्लाॅट है और सदस्य 50 से ज्यादा, मुहिम के दौरान यह विवाद दूर हुए।
- आस्था संस्था 1991 में बनी है, संचालक वीरेंद्र जैन ने बताया कि वरीयता सूची का विवाद था। क्योंकि प्लाॅट कम है, मुहिम में यह समस्याएं दूर हुई, इसलिए प्लाॅट दे रहे हैं।